न्यायपालिका में 'अग्नि-कांड': महाभियोग के बीच जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा; करोड़ों की अधजली नकदी ने बदला तकदीर का पन्ना
'Conflagration' in the Judiciary: Justice Yashwant Varma
नई दिल्ली। 15 मार्च 2025 की रात तुगलक रोड स्थित सरकारी आवास पर लगी आग व धुएं के बीच बरामद हुईं अधजली नोटों की गड्डियाें ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की जिंदगी को स्याह पन्नों में बदल दिया।
दिल्ली हाई कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश में शुमार न्यायमूर्ति वर्मा का जल्द ही मुख्य न्यायाधीश बनना तय माना जा रहा था, लेकिन इस एक घटना के बाद सब बदल गया।
सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने न सिर्फ उनका इलाहाबाद हाई कोर्ट स्थानांतरण (न्यायिक कार्य से विरत करते हुए) किया गया, बल्कि दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय से रिपोर्ट मिलने के बाद आंतरिक जांच का आदेश दिया था।
मामले की जांच के बाद पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जीएस संधावालिया और कर्नाटक हाई कोर्ट की न्यायाधीश अनु शिवरामन ने अपनी जांच रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश को सौंपी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका
आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने की थी यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की सिफारिश की थी। मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश के खिलाफ यशवंत ने मई-2025 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन सुप्रीम ने राहत देने से इनकार करते हुए न्यायमूर्ति वर्मा की याचिका खारिज कर दी थी।
जुलाई 2025 में लोकसभा के 145 और राज्यसभा के 63 सदस्यों के समर्थन से संसद के दोनों सदनों में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाए गए थे। उक्त प्रस्तावों को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने महाभियोग की कार्यवाही शुरू की और मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की।
लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय को भी यशवंत वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, शीर्ष अदालत से न्यायमूर्ति वर्मा को कोई राहत नहीं मिली और उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। लोकसभा में महाभियोजन की कार्यवाही के बीच गुरुवार यानी नौ अप्रैल को न्यायमूर्ति वर्मा ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेज दिया।
यह था मामला
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास से 14-15 मार्च 2025 की रात को आग लगने की सूचना पर अग्निशमन विभाग की टीम पहुंची थी। आवास के बाहर हिस्से में बने एक कमरे में आग को बुझाने के दौरान 500-500 के नोटों की बेहिसाब अधजली गड्डियां बरामद हुई थीं। इस दौरान न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा दिल्ली से बाहर थे और सूचना मिलने पर अगले दिन दिल्ली पहुंचे थे।
यशवंत वर्मा मामले की क्रोनोलाॅजी
- 14-15 मार्च 2025 रात्रि: दिल्ली में जस्टिस वर्मा के घर पर आग लगने की घटना के दौरान नकद राशि बरामद हुई।
- 22 मार्च, 2025: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपों की जांच के लिए तीन हाई कोर्ट के जजों की एक समिति गठित की।
- तीन मई 2025: जांच कमेटी ने न्यायमूर्ति वर्मा को कदाचार का दोषी पाया और उन्हें पद से हटाने की सिफारिश की।
- तीन जुलाई, 2025: केंद्र सरकार ने न्यायूमर्ति वर्मा को पद से हटाने के प्रस्ताव के लिए हस्ताक्षर जुटाने की प्रक्रिया शुरू की।
- 12 अगस्त, 2025: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एक जांच समिति का गठन किया।
- नौ अप्रैल 2026: महाभियोग की प्रक्रिया के बीच न्यायमूर्ति वर्मा ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से इस्तीफा दे दिया।